पी.एच.एम. गतिविधियां

फसलोत्तर प्रबन्धन गतिविधियां

क्र.सं.

विवरण

साईज लिंक
1 एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फण्ड   View
2 केंद्रीय सहकारी बैंकों के माध्यम से कृषि प्रसंस्करण, कृषि-व्यवसाय और कृषि-निर्यात इकाइयों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय योजना 4.6 MB View / Download
3
जन घोषणा बिन्दु संख्या 1.10 के अंतर्गत माह फरवरी 2020 में कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात नीति 2019 के प्रशिक्षण कार्यक्रम 94 KB View/ Download
4 एफ.पी.ओ. सूची   518 KB View/ Download
5 जन घोषणा के बिन्‍दु संख्‍या 1.10 की पालना में कृषि प्रसंस्‍करण गतिविधियों हेतु पंचायत समिति स्‍तर पर प्रशिक्षण केन्‍द्रों की सूची
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6 फल सब्‍जी एवं फूल निर्यात प्रोत्‍साहन योजना 2016-17 1.8 MB View/ Download
7 फल-सब्‍जी एवं फूल निर्यात पंजीकरण हेतु प्रार्थना पत्र 345 KB View/ Download
8 राजस्थान मसाला निर्यात प्रोत्साहन योजना 2015 942 KB View/ Download
9 राजस्थान मसाला निर्यात प्रोत्साहन योजना के पंजीकरण हेतु प्रार्थना पत्र 428 KB
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10 पम्पलेट्स   View/ Download
11 कृषि प्रसंस्करण एवं विपणन प्रोत्साहन कृषकों के द्वार योजना - 2017 का आदेश दिनांक 11.05.2017 3.0 MB View/ Download
12 कृषि प्रसंस्करण एवं विपणन प्रोत्साहन कृषकों के द्वार योजना - 2017 349 KB View/ Download
13 सावित्री बाई फूले महिला कृषक सशक्तिकरण योजना
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14 ई-भुगतान प्रोत्साहन योजना
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15 मुख्यमंत्री काश्तकार विदेश प्रोत्साहन यात्रा योजना
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किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य प्रदान करने के उदे्दश्य से बोर्ड के वर्ष 1996 में निर्यात संवर्धन गतिविधियों की शुरूआत की और अब तक बोर्ड किन्नू, नारंगी, बीज मसालों को निर्यात कराने में सफल रहा है।

निर्यातोन्मुख मसाले मण्डियों का विकास

राज्य से मसालों के निर्यात की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए मसालों एवं अन्य मसाला उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित मण्डियों को विशेष रूप से निर्यात के लिए बढ़ावा दिया जा रहा हैः-

क्र.सं.
मण्डी समिति का नाम जिन्सों का नाम
1 मेड़तासिटी जीरा
2 जोधपुर मेथी, जीरा, मिर्च
3 सुमेरपुर/ रानी मेथी
4 जयपुर/ सीकर मेथी, जीरा
5 रामगंजमण्डी धनियां
6 प्रतापगढ़ दिलसीड, अजवाईन, खसखस बीज, लहसुन और मेथी
7 आबू रोड/ रेवदर सौंफ

   

फसलोत्तर प्रबन्धन गतिविधियों एवं निर्यात

राज्य से निर्यात एवं फसलोत्तर प्रबन्धन गतिविधियों को बढावा देने के लिए राजस्थाान राज्य कृषि विपणन बोर्ड जयपुर में निर्यात एवं फसलोत्तर प्रबन्धन शाखा बनाई गई है। यह शाखा फसलोत्तर प्रबन्धन गतिविधियां व कृषि निर्यात के संदर्भ में जानकारी प्रदान करती है ।

निर्यात क्षमता

राज्य में निम्नलिखित कृषि जिन्सों एवं उनके उत्पादों के निर्यात की अपार संभावनाएं हैं।

-    बीज मसाला

-    लहसुन, लालमिर्च

-    सूखे गुलाब एवं गुलाब के उत्पाद

-    खट़टे फल एवं उनके उत्पाद

-    प्याज एवं प्रसंस्कृत सब्जियां

-    तिल के बीज (प्रसंस्कृत)

-    कोटा एवं बूंदी के बासमती चावल

-    गैर खाद्य तेल जैसे एरंडी, नीम, तुम्बा। और जेटरोफा

-    औषधीय पौधों का उत्पादन जैसे इसबगोल, मेहंदी, इत्यादि

-    कच्चा  सूत, ग्वारगम, शहद आदि

-    ग्वार उत्पााद

-    शहद एवं शहद उत्पाद

-    नाश्तें हेतु भुजिया, पापड इत्यादि

कृषि उद्योग

कृषि व्यवसाय क्षेत्र अपेक्षाकृत नया क्षेत्र है तथा इस क्षेत्र का विकास तुलनात्मक रूप से नया है। राज्य के उद्योगों में इस क्षेत्र का बड़ा हिस्सा है, क्योंकि लगभग 10000 ईकाईयों छोटे पैमाने पर काम कर रही है और 74 ईकाईयां मध्यम एवं बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र में आ गए हैं।

कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र विलायक उत्कर्षण (Solvent extraction) Oleo-resins (ओलियो रेजिस), किन्नू /नारंगी का रस, माल्ट अर्क फूलों की खेती और कई अन्य वस्तुएं जिनके उत्पाद तैयार किये जा सकते है, कई उद्योगों के विकास के अवसर प्रदान करते हैं । इनके अलावा मशरूम, टमाटर प्रसंस्करण, आम, बेर, अनार, और अन्य सब्जी जैसे प्याज, आलू, लहसुन में भी उद्योगों के विकास के अवसर है।

हर्बल एवं औषधीय पौधों, भेड़, बकरी, भैंस मांस प्रसंस्करण, कुक्कुट, पोल्ट्री  उत्पादों की निर्यात संभावनाएं उज्जवल है। राज्य  सरकार इस क्षेत्र की जरूरतों के लिए प्रशिक्षण, प्रोद्योगिक उन्नयन, बुनियादों ढांचे में सुधार एवं प्रगतिशील सरकारी नीति के साथ कार्य कर रही है।

केन्द्र् सरकार के समर्थन और कृषि एवं खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न संस्थानों के समन्वित प्रयासों के साथ  यह उम्मीद की जाती है कि ये उद्योग राजस्थान के कृषि औद्योगिक विकास में अपना उचित स्थान प्राप्त करेंगे। वर्तमान में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग बाहरी एवं आंतरिक दोनों बाधाओं  का सामना कर रहे है।

बाहरी बाधाओं में अन्ततर्राष्ट्रीय विपणन ढांचे में अधिक लागत से नुकसान शामिल है, जबकि आंतरिक बाधाओं मे निम्नालिखित शामिल है –

-    गुणवत्ता– युक्त कच्चा माल

-    विशेष उत्पादन

-    उपयुक्त संसाधित तकनीक की कमी

-    वितरण के लिए बुनियादी ढांचा

-    भण्डारण

-    विपणन

-    कृषि आधारित उधोगों की संभावनाएं

अब एक और क्रान्ति का समय आ गया है, क्योंकि हमें कृषि को वैश्विक परिप्रेक्ष्य से देखने की जरूरत है। कृषि को उत्पादन से आगे बढकर इससे सम्बन्धित मुद्दे जैसे विपणन, प्रसंस्कषरण, अनाज, तिलहन, फल, सब्जियों, फूलों की खेती, मसाले, औषधीय पौधों के उत्पादन, डेयरी उत्पादों मांस उत्पादों में मूल्यवृध्दि के लिए ध्यान देना होगा।

घरेलू बाजार में कृषि उत्पादों की बदलती मांग, तेजी से शहरीकरण और खाने की आदतों में बदलाव के परिणामस्वारूप बढ़ोतरी होगी। साथ ही बायोटेक्नोलोजी के क्षेत्र में प्रगति और हाईटेक खेती प्रथाओं की शुरूआत के कारण गुणवत्ता  पूर्ण उत्पादन की मांग हमारी कृषि के लिए आने वाले समय में एक प्रमुख भूमिका निभाएगी।

राज्य सरकार बड़े पैमाने पर कृषि विपणन एवं आधारभूत सुविधाओं (जैसे सम्पर्क सड़कें, ग्रामीण प्राथमिक बाजार, ग्रामीण गोदाम, कृषि उपज मण्डीे समिति के निर्माण/ विकास में  प्रत्यनशील है। कुशल विपणन प्रणाली के लिए उत्पामदक विपणन सहकारी समितियां एवं फसलोत्तर प्रबन्धन आवश्यक है जिससे कि किसानों को अपनी उपज का लाभकारी मूल्य मिल सके तथा बिचौलिये के शोषण से बचाया जा सके, जहां उपभोक्ता को उचित मूल्य पर गुणवत्ताा पूर्वक उत्पाद प्राप्ति हो सके।

किसानों के लाभ के लिए सौंपे गए अन्य महत्वपूर्ण कार्य/ कार्यक्रम जैसे विपणन कर्मियों को प्रशिक्षण, प्रचार-प्रसार, निगरानी और बाजार अनुसंधान के कार्य शुरू किये गए हैं।