परिचय

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क्र.सं. विवरण Size
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1 संगठनात्मक ढांचा 358 KB View/ Download
2 स्वीकृत पदों का विवरण 1.5 MB
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3 सूची - प्रशासक, महाप्रबन्धक (प्रशासन) एवं सचिव, बोर्ड 77 KB View/ Download

 

कृषि उत्‍पादन के पश्चात् फसलोत्‍तर तकनीक एवं कृषि विपणन की भूमिका महत्‍वपूर्ण है । उत्‍पादकों को लाभकारी कीमतों के अभाव में कृषि उत्‍पादन में कमी होती है। इसके मध्‍यनजर राज्‍य सरकार ने विनियमित बाजारों के महत्‍व को स्‍वीकार किया, जिससे कि किसानों को उचित प्रतिलाभ सुनिश्‍चत हो सके। कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी के उपायों के साथ-साथ कृषि विपणन व्यवस्था को सुदृढ़ किये जाने की आवश्यकता है, जिससे कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य अविलम्ब तथा बिना किसी अनाधिकृत कटौती के मिल सके । किसान को उसकी उपज के लिए प्राप्त मूल्य और उपभोक्ता द्वारा भुगतान की गई लागत के बीच के अन्तर को कम करने का प्रयास किया जाना चाहिए।

उक्त उद्देश्यों की पूर्ति हेतु राज्य सरकार वर्ष 1961  में राजस्थान कृषि उपज विपणी अधिनियम पारित किया, जो वर्ष 1964 से लागू हुआ ।

बोर्ड की स्थापना एवं गठन

राज्य सरकार ने वर्ष 1967 में श्री यशवन्त सिंह नाहर की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया । इस समिति ने अन्य राज्यों की तरह कृषि उपज मण्डी समितियों के समग्र विकास के लिए राज्य में एक स्वायत्त निकाय (बोर्ड) की स्थापना के लिए सिफारिश की । इस समिति की सिफारिश पर, राज्य सरकार ने दिनांक 14.07.1973 को राजस्थान कृषि विपणन अधिनियम 1961 में संशोधन किया और राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड का गठन राज्य सरकार के आदेश क्रमांक 1(16)(5) दिनांक 06.06.1974 के द्वारा किया गया ।

प्रारम्भ में बोर्ड में 24 सदस्यों का प्रावधान रखा गया था, जिसमें से 10 सदस्य मण्डी समितियों के अध्यक्षों में से थे, 2 प्रतिनिधि मण्डी समितियों के लाईसेंस धारक व्यापारी, 2 जन प्रतिनिधि, 1 अर्थशास्त्री, कृषि सम्बद्ध विभाग/ स्वायत्त निकाय के अधिकारियों एवं सचिव, कृषि विपणन बोर्ड (पदेन सचिव) बोर्ड के सदस्य थे । निदेशालय कृषि विपणन की स्थापना के पश्चात्, निदेशक कृषि विपणन भी बोर्ड के सदस्य बने, जिससे सदस्यों की संख्या 25 हो गई ।

श्री यशवन्त सिंह नाहर की अध्यक्षता में 6 जून 1974 को सदस्यों के नामांकन द्वारा प्रथम बोर्ड गठित किया गया था। यह बोर्ड राज्य सरकार द्वारा 09.01.1978 को भंग कर दिया गया था और प्रशासक को बोर्ड में नियुक्त किया गया था । इसके बाद श्री पृथ्वी सिंह देवड़ा की अध्यक्षता में दिनांक 05.12.1978 को फिर से बोर्ड का गठन किया गया, जिसे दिनांक 05.12.1980 भंग कर दिया गया । तब से ही भारतीय प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारियों को बोर्ड के प्रशासक के रूप में नियुक्त किया जा रहा है ।

राष्ट्रीय कृषि आयोग की सिफारिश पर, अन्य राज्यों की तरह, कृषि विपणन निदेशालय वर्ष 1980 में स्थापित किया गया था। निदेशालय कृषि विपणन के कार्य राजस्थान कृषि विपणन उत्पाद विनियमन अधिनियम को लागू करना, सभी मण्डियों के नियमन, ग्रेडिंग और एगमार्क, मार्केट इन्टेलिजेन्स (Intelligence), भूमि अधिग्रहण, बजट आवंटन और मण्डियों के प्रशासनिक कार्य है ।

राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा मण्डी क्षेत्र में बुनियादी ढ़ाचें का विकास, किसान/अधिकारियों को प्रशिक्षण और विपणन प्रणाली में सुधार से संबंधित कार्य किये जाते हैं ।