फसल प्रदर्शन

                                                                        फसल प्रदर्शन
(1) फसल प्रदर्शनों के आयोजन का उद्देश्य :-
• फसल प्रदर्शनों का आयोजन उन्नत शष्य क्रियाओं का कृषकों द्धारा अपनाने एंव प्रौद्योगिकी के हस्तानान्तरण हेतु किया जाता है। फसल प्रदर्शन नवीनतम शष्य क्रियाओं एवं तकनीक को अपनाने के लिये कृषि विस्तार का एक सशक्त माध्यम है। फसल प्रदर्शनों को अधिक प्रभावी बनाने के लिये "कार्य करते हुए सीखना" (Learning by doing) के सिद्धान्त पर फसल प्रदर्शनों का आयोजन किया जाना है ।
 
 (2) फसल प्रदर्शनों हेतु पात्रता एवं कृषक चयन :-
• प्रदर्शनो के आयोजन में जिले की जनसंख्या प्रतिशत के आधार पर अनुसूचित जाति, अनु0 जनजाति, गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करनें वाले तथा अन्त्योदय कृषक परिवारों की भागीदारी सुनिश्चित करावें साथ ही 30 प्रतिशत महिला कृषकों की भागीदारी भी सुनिश्चित करावें एवं लघु सीमान्त कृषको को प्राथमिकता दी जाती है। 
• विभागीय योजनाओं के अन्तर्गत अनुदान हेतु कृषकों को राजस्व रिकार्ड के आधार पर भूमि का स्वामित्व रखने, सामान्य या विशेष आवंटी होने या गैर खातेदार होने पर अनुदान हेतु पात्र माना जाता है। इसी प्रकार कृषक के स्वयं के नाम से भू स्वामित्व नहीं होने की स्थिति में (कृषक के पिता के जीवित होने या मृत्यु पश्चात नामान्तरण के अभाव में) यदि आवेदन कृषक स्वयं के पक्ष में भू-स्वामित्व में नोशनल शेयर धारक का प्रमाण पत्र राजस्व/हल्का पटवारी से प्राप्त कर आवेदन के साथ प्रस्तुत करता है। ऐसे कृषक भी अनुदान हेतु पात्र माना जाता है।
• फसल प्रदर्शनों के आयोजन हेतु कृषि पर्यवेक्षक द्वारा संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच एवं अन्य निर्वाचित जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक में विचार विमर्श कर पात्र कृषकों तथा कलस्टर का चयन किया जाता है। फसल प्रदर्शनों आयोजन हेतु कलस्टर का चयन लौटरी के माध्यम से किया जाता है। कलस्टर चयन में लौटरी सिस्टम को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए पहले मानक आकार के कम से कम तीन गुना कलस्टरों का चयन किया जाता है तथा उसके बाद लौटरी के माध्यम से कलस्टर का चयन कर, चयनित कलस्टर में फसल प्रदर्शनों का आयोजन किया जाता है।
 
(3) विभिन्न योजनान्तर्गत फसल प्रदर्शनों का आयोजन :-
• राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन-तिलहन के अन्तर्गत मूंगफली, सोयाबीन, तिल, अरण्डी, सरसों, अलसी फसलों के कलस्टर फसल प्रदर्शनों का आयोजन किया जाता है। योजनान्तर्गत 50 हैक्टेयर फसल प्रदर्शन क्षेत्र का एक कलस्टर होता है। 
• राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन-दलहन के अन्तर्गत चना, मोठ, मूंग, उड़द के कलस्टर फसल प्रदर्शनों का आयोजन किया जाता है। योजनान्तर्गत एक कलस्टर 100 हैक्टेयर फसल प्रदर्शन क्षेत्र का होता है। इसके अतिरिक्त फसल पद्धति आधारित प्रदर्शनों का आयोजन किया जाता है। जिसके अन्तर्गत जिस खेत में खरीफ में फसल प्रदर्शन आयोजित किया जाता है। उसी खेत में रबी सीजन में भी फसल प्रदर्शन का आयोजन किया जाता है। इनमें मक्का-चना, बाजरा-चना, ज्वार-चना, मूंग- गेहॅू, उड़द-गेहॅू, मूंग-जौ व उड़द-रबी मक्का के प्रदर्शन आयोजित किये जाता है।
• राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन-गेहॅू के अन्तर्गत गेहॅू के कलस्टर फसल प्रदर्शनों का आयोजन किया जाता है। योजनान्तर्गत एक कलस्टर 100 हैक्टेयर फसल प्रदर्शन क्षेत्र का होता है। इसके अतिरिक्त फसल पद्धति आधारित प्रदर्शनों का आयोजन किया जाता है। जिनमें मूंग-गेहॅू, बाजरा- गेहॅू व मक्का- गेहॅू के प्रदर्शन आयोजित किये जाता है। 
• राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन-मोटा अनाज के अन्तर्गत मक्का व जौ के कलस्टर फसल प्रदर्शनों का आयोजन किया जाता है। योजनान्तर्गत एक कलस्टर 100 हैक्टेयर फसल प्रदर्शन क्षेत्र का होता है। 
• राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन-न्यूट्री सीरियल के अन्तर्गत बाजरा व ज्वार के कलस्टर फसल प्रदर्शनों का आयोजन किया जाता है। योजनान्तर्गत एक कलस्टर 100 हैक्टेयर फसल प्रदर्शन क्षेत्र का होता है।
 
 (4) फसल प्रदर्शनों पर अनुदान/सहायता :-
• फसल प्रदर्शनों के आयोजन में लाभार्थी कृषक को सहकारी संस्था के माध्यम से अनुदानित दर पर कृषि आदान यथा बीज, सूक्ष्म पोषक तत्व, जैव उर्वरक, कीटनाशी व खरपतवारनाशी उपलब्ध करवाये जाते है।
• राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन-तिलहन के अन्तर्गत कुल लागत का 50 प्रतिशत तथा शेष राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजनाओं के तहत कुल लागत का शत-प्रतिशत अनुदान दिया जाता है।
• अनुदान सहायता की अधिकतम सीमा फसलवार निर्धारित है। मूंगफली हेतु 10,000 रूपये, सोयाबीन हेतु 6,000 रूपये, तिल हेतु 1,800 रूपये, अरण्डी, अलसी व सरसों हेतु 3,000 रूपये, गेहॅू व खरीफ दलहन हेतु 7,500 रूपये, चना हेतु 9,000 रूपये, मक्का हेतु 5,000 रूपये, जौ हेतु 6,000 रूपये, ज्वार हेतु 3,670 रूपये तथा बाजरा हेतु 3,600 रूपये प्रति हैक्टेयर अनुदान के रूप में कृषि आदान दिये जाता है।