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निगरानी और मूल्यांकन

प्रबोधन एवं मूल्‍यांकन

प्रबोधन एवं मूल्यांकन प्रकोष्ठ की मुख्य गतिविधियॉ निम्नानुसार हैंः-

1. प्रबोधन सर्वेक्षणः

विभाग में विस्तार कार्यकर्ताओं द्वारा चलाये जा रहे विस्तार कार्यक्रम के क्रियान्वयन एवं इसके माध्यम से कृषकों तक नवीनतम कृषि तकनीकी ज्ञान के प्रसारण के आंकलन हेतु नियमित रूप से प्रत्येक फसल मौसम में प्रबोधन सर्वेक्षण करवाया जाता है।

2. मूल्यांकन सर्वेक्षणः

कृषि विस्तार कार्यक्रम के फलस्वरूप कृषकों द्वारा विभिन्न प्रभावी बिन्दुओं के अपनाने के परिणामस्वरूप प्रमुख फसलों की उत्पादकता में बढोतरी के आंकलन हेतु मूल्यांकन सर्वेक्षण के अन्तर्गत नियमित रूप से प्रत्येक फसल मौसम में फसल कटाई प्रयोग सम्पादित करवाये जाते हैं। साथ ही प्रभावी बिन्दुओं को अपनाने वाले कृषकों के प्रतिशत का आंकलन भी किया जाता है।

3. विशेष अध्ययनः

विभिन्न क्रियान्वित कार्यक्रमों के प्रभाव का अध्ययन कर कार्यक्रम क्रियान्वयन में रही कमियों व उनके निराकरण हेतु सुझाव देने के उद्देश्य से विशेष अध्ययन सर्वेक्षण करवाये जाते हैं। विशेष अध्ययन समय-समय पर मॉग तथा आवश्यकता अनुसार संपादित करवाये जाते हैं।

वर्ष 2017-18 में निम्न विशेष अध्ययन सर्वेक्षण करवाये गए-

  •  राष्ट्रीय तिलहन एवं ऑयलपाम मिशन के मिनिमिशन-I एवं III के वर्ष 2015-16 व 2016-17 के क्रियान्वयन एवं प्रभाव का मूल्यांकन
  •  राष्ट्रीय तिलहन एवं ऑयलपाम मिशन के मिनिमिशन-I एवं III के वर्ष 2017-18 का तात्कालिक सर्वेक्षण। 
  •  राष्ट्रीय कृषि विकास योजनान्तर्गत Promotion of 40 Crop Specific FPO’s In Rajasthan परियोजना का प्रबोधन एवं मूल्यांकन सर्वेक्षण। 

 वर्ष 2018-19 में निम्न विशेष अध्ययन सर्वेक्षण करवाये जाने प्रस्तावित हैं। 

  •  दिगोद (कोटा) एवं डीग (भरतपुर) कम्यूनिटी रेडियो स्टेशन की उपादेयता एवं कार्यक्रम के प्रभाव का सर्वेक्षण।

4. अन्य गतिविधियॉः 

  • कृषि कर्मण पुरस्कार- यह पुरस्कार भारत सरकार के कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा कुल खाद्यान उत्पादन, चावल, गेहॅू, दलहन, मोटे अनाज तथा तिलहन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रति वर्ष दिया जाता है। इस पुरस्कार हेतु शाखा द्वारा विभाग के प्रस्ताव तैयारकर भारत सरकार के समक्ष प्रस्तुत किये जाते हैं। गेहूॅ उत्पादन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य को वर्ष 2014-15 का कृषि कर्मण पुरस्कार प्रदान किया गया। पुरस्कार के रूप में राशि रूपये 2 करोड नकद, प्रशस्ति पत्र एवं ट्राफी प्रदान की गई।
  •  शिविरों की प्रगति का संकलन- संवेदनशील और पारदर्शी प्रशासन के माध्यम से प्रदेशवासियों के कार्य निष्पादन हेतु राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर विभिन्न प्रकार के शिविरों का आयोजन किया जाता है। उच्चस्तरीय निर्णय के अनुसार इन शिविरों में विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी भाग लेकर विभागीय योजनाओं तथा नवीनतम कृषि तकनीकी की जानकारी उपस्थित जनसमुदाय को देते हैं और विभाग से संबंधित समस्याओं का निराकरण करते हैं। इन शिविरों में विभाग द्वारा संपादित कार्यों की प्रगति का राज्य स्तर पर संकलन प्रकोष्ठ द्वारा किया जाता है।