ग्राह्य परीक्षण केन्द्र

                                                                                                ग्राह्य परीक्षण केन्द्र (ए0टी0सी0)

उद्देश्‍य:

ग्राह्य परीक्षण केन्द्रों का मुख्य उद्देश्‍य राज्य के कृषि विश्‍वविद्यालयों के अधीन कार्यरत कृषि अनुसंधान केन्द्रों से प्राप्त नवीनतम कृषि तकनीकी अनुसंधान सिफारिशों का विभिन्न कृषि जलवायुवीय क्षेत्रों में अग्रिम सत्यापन करना है, जिससे इनकी अधिकतम ग्राह्यता तथा कृषकों को अधिक से अधिक आर्थिक लाभ मिल सके। इन केन्द्रों पर कृषि जलवायु खण्ड की अनुसंधान सिफारिशों का स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कृषि विस्तार कार्यकर्त्‍ताओं से प्राप्त फीडबैक के आधार पर उपयोगिता का पता लगाने हेतु परीक्षणों द्वारा संशोधन किया जाता है। व्यवहारिक एवं उपयोगी पाए जाने पर उन्हे कृषि जलवायुविक खण्डवार की पैकेज ऑफ प्रेक्टिस में शामिल किया जाता है। इन केन्द्रों द्वारा क्षेत्रिय स्तर पर प्राप्त कृषि संबंधित सामयिक विशिष्ट समस्याओं पर ओब्जरवेशनल परीक्षणों का आयोजन कर उनका समाधान किया जाता है। इसके अतिरिक्त ग्राह्य परीक्षण केन्द्रों पर निम्नानुसार गतिविधियां आयोजित की जाती है-

गतिविधियां:

  • कृषकों एवं विस्तार कार्यकर्त्‍ताओं को नवीन तकनीकी ज्ञान देने एवं उनकी समस्या-समाधान हेतु प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं।
  •  किसान मेला एवं प्रदर्शन आयोजित कर नई तकनीक प्रसार हेतु परीक्षणों को सीधे ही किसानों को दिखाकर लाभान्वित किया जाता है।
  • निजी क्षेत्र की संकर/उन्नत किस्म के बीज एवं अन्य आदानों की ग्राह्यता की जांच ग्राह्य परीक्षण केन्द्रों पर की जाती है।
  •  इन केन्द्रों पर मॉडल जैविक फार्म विकसित किए जाकर केन्द्र एवं कृषक क्षेत्र पर परीक्षणों व प्रदर्शनों का आयोजन कर जैविक खेती की उन्नत तकनीक विकसित की जा रही है।
  • समन्वित कीट-व्याधि प्रबन्धन हेतु जैव-कारकों का उत्पादन, केचुँआ संवर्धन व वर्मीकम्पोस्ट सहित जैव आदानों के उत्पादन की ईकाईयां स्थापित की गई है।
  • मौसम में बदलाव के साथ क्षेत्र में सम्भाव्य कीट-व्याधि प्रकोप की वस्तुस्थिति जानने हेतु विस्तार अधिकारियों के साथ नियमित सर्वे किया जाता है।
  • राजस्थान राज्य बीज निगम के माध्यम से बीज उत्पादन का कार्यक्रम भी लिया जाता है।

विगत 5 वर्षों में आयोजित परीक्षणों की प्रगति


वर्ष

सीजन वार आयोजित परीक्षणों की संख्‍या

वर्ष में आयोजित कुल परीक्षणों की संख्‍या

एटीसी पर

कृषक खेत पर

खरीफ

रबी

कुल

खरीफ

रबी

कुल

खरीफ

रबी

कुल

2014-15

108

100

208

203

198

401

311

298

609

2015-16

97

78

175

167

190

357

175

357

532

2016-17

91

75

166

169

147

316

260

222

482

2017-18

111

98

209

124

162

286

235

260

495

2018-29

119

121

240

152

172

324

271

293

564

2019-20

106

100

206

175

163

338

281

263

544

2020-21
(खरीफ तक)

107

 

 

195

 

 

302

 

 

राजस्थान के कृषि जलवायुविक क्षेत्र एवं उनके अनुसार कार्यरत एटीसी


क्षेत्र सं.

नाम क्षेत्र

सम्मिलित जिले

औसत वर्षा (मिमी)

मुख्य फसलें

एटीसी

खरीफ

रबी

 

प्रथम-ए

शुष्क पश्चिमी मैदानी क्षेत्र

बाडमेर एवं जोधपुर

200-370

बाजरा, मोठ, तिल

गेहूं, सरसों, जीरा

रामपुरा (जोधपुर)

प्रथम-बी

उत्तर पश्चिमी सिंचित मैदानी क्षेत्र

श्रीगंगानगर एवं हनुमानगढ

100-350

कपास, ग्वार

गेहूं, सरसों, चना

श्रीकरनपुर एवं हनुमानगढ

प्रथम-सी

अति शुष्क  आंषिक सिंचित पश्चिमी मैदानी क्षेत्र

बीकानेर, जैसलमेर एवं चुरू

 

बाजरा, मोठ, ग्वार

गेहूं, सरसों, चना

लूनकरनसर (बीकानेर)

द्वितीय-ए

अन्तः स्थलीय जलोत्सरण के अन्तर्वर्ती मैदानी क्षेत्र

नागौर, सीकर, झुन्झुनु एवं चुरू का भाग

300-500

बाजरा, मोठ, ग्वार

गेहूं, सरसों, चना

आबूसर (झुन्झुनु)

द्वितीय-बी

लूनी नदी का अन्तर्वर्ती मैदानी क्षेत्र

जालोर, पाली, सिरोही एवं जोधपुर का भाग

300-500

बाजरा, ग्वार, तिल

गेहूं, सरसों

सुमेरपुर (पाली)

तृतीय-ए

अर्द्ध शुष्क पूर्वी मैदानी क्षेत्र

जयपुर, अजमेर, दौसा एवं टोंक

500-700

बाजरा, ग्वार, ज्वार

गेहूं, सरसों, चना

तबीजी (अजमेर)

तृतीय-बी

बाढ़ सम्भाव्य पूर्वी मैदानी क्षेत्र

अलवर, धोलपुर, भरतपुर, करोली एवं सवाई माधोपुर

500-700

बाजरा, ग्वार, मूंगफली

गेहूं, जौ, सरसों, चना

मलिकपुर (भरतपुर)

चतुर्थ-ए

अर्द्ध आर्द्र दक्षिणी मैदानी क्षेत्र

भीलवाडा, राजसमंद, चित्तौडगढ, उदयपुर एवं सिरोही के भाग

500-900

मक्का, दलहन, ज्वार

गेहूं, चना

चित्तौडगढ

चतुर्थ-बी

आर्द्र दक्षिणी मैदानी क्षेत्र

डूंगरपुर, बांसवाडा, प्रतापगढ एवं चित्तौडगढ व उदयपुर के भाग

500-1100

मक्का,धान, ज्वार, उडद

गेहूं, चना

स्थापित नहीं

पंचम

आर्द्र दक्षिणी पूर्वी मैदानी क्षेत्र

कोटा, बारां, बून्दी, झालावाड एवं सवाई माधोपुर का भाग

650-1000

ज्वार, धान, सोयाबीन

गेहूं, सरसों

छत्रपुरा (बूंदी)

 

ग्राह्य परीक्षण केन्द्रों रामपुरा (जोधपुर),  हनुमानगढ,  आबूसर (झुन्झुनु),  तबीजी (अजमेर),  मलिकपुर (भरतपुर),  चित्तौड़गढ़ एवं छत्रपुरा (बून्दी) पर कीट-व्याधि प्रबन्धन (आईपीएम) प्रयोगशालायें स्थापित है। इन प्रयोगशालाओं में बायो-एजेण्ट्स जैसे ट्राईकोडर्मा, बावेरिया, मेटेरिजम, ट्राईकोग्रामा, एन0पी0वी0 आदि पर अनुसंधान किया जा रहा है एवं इनका उत्पादन कर किसानों को वितरण किया जा रहा है।