राज्य सरकार द्वारा किसान आयोग के उद्देष्यों का निम्नानुसार निर्धारण किया गया हैः-

·         कृषि एवं संबंद्ध क्षेत्र की जाँच व समीक्षा करना, कृषि के टिकाउ विकास हेतु आर्थिक पारिस्थितिकी व पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए सुझाव देना।

·         कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य क्षेत्र की समस्याओं के समय पर निराकरण हेतु आवश्यक उपाय किये जाने के लिये राज्य सरकार को अवगत करवाना ताकि कृषक परिवारों को कठिन परिस्थितियों से बचाया जा सके।

·         कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र की उत्पादकता में वृद्धि, टिकाउ एवं लाभकारी विकास हेतु तकनीकी का विकास एवं इसका प्रचार-प्रसार, आदान आपूर्ति व आगम-निगम मूल्यों हेतु सिफारिश करना।

·         मांग व आपूर्ति में उत्पन्न होने वाले अंतर को राज्य सरकार के ध्यान में लाना जिससे इसका कोई विपरीत प्रभाव कृषकों पर नहीं हो।

·         कृषि एवं मत्स्य क्षेत्र में कृषि जलवायवीय खंडों की आवश्यकता के अनुरूप पंचवर्षीय योजनाओं को तैयार करने हेतु आवष्यक जानकारी उपलब्ध करवाना।

·         राज्य के कृषि उत्पादों की गुणवत्ता को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढाने हेतु व देश-विदेश में व्यापार वृद्धि की संभावनाओं को बढाने हेतु सुझाव देना।

·         फार्म प्रक्षेत्र व गैर फार्म प्रक्षेत्र से आय वृद्धि व रोजगार सृजित करने हेतु कृषिगत रणनीति, योजनायें व नीतियों के बारे में सुझाव देना।

·         ग्रामीण समुदाय के सामाजिक व आर्थिक मुद्दे यथा-घटते रोजगार, बढता कर्ज, घटती आय इत्यादि पर उचित नीतिगत सुझाव देना।

·         विभिन्न कृषक संगठनों/ संघों से वार्ता कर सरकार को उनकी मांगों से अवगत करवाना तथा सुझाव देना।

·         ग्रामीण परिवारों को सकारात्मक व नकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाली सरकारी नीतियों के सभी विषयों पर किसान की आवाज के रूप में कार्य कर सुझाव देना।

·         इसके अतिरिक्त राज्य सरकार कृषकों को प्रभावित करने वाली नीतियों के बारे में आयोग से चर्चा भी करेगी।