Adminstrative report

समन्वित बागवानी विकास मिषन उप योजनाराष्ट्रीय बागवानी मिशन

 

दिशा-निर्देश

 

 

 

के.प्र.यो. राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत बागवानी फसलों-फल, सब्जियां, मसाले एवं  फूल व औषधीय एवं सुगंधीय पौधों के सर्वांगिण विकास को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न कार्यक्रम क्रियान्वित किये जा रहे है। योजनान्र्तगत क्षेत्र विषेष की कृषि जलवायुवीय स्थितियों में तुलनात्मक रूप से सर्वाधिक उपयुक्त एवं संभावना वाली बागवानी फसलों को वर्तमान एवं भविष्य की मांग को देखते हुये सघन रूप में बढ़­ावा दिया जा रहा है। योजनान्र्तगत बागवानी फसलों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने एवं आनुवांशिक उन्नयन के लिए उच्च प्रौद्योगिकियांे को अपनाकर मुख्य रूप से उत्पादन, उत्पादकता व फसल उत्पाद की गुणवत्ता को बढ़ाने तथा फसलोत्त्तर प्रबंधन पर विषेष ध्यान दिया जा रहा है।योजना अन्र्तगत कृषि एवं सहकारिता विभाग, भारत सरकार द्वारा जारी अनुदान प्रावधान अनुसार विभिन्न कार्यक्रमों के क्रियान्वयन दिशा-निर्देश निम्नानुसार है-

सामान्य निर्देषःु  योजना कार्यक्रमों का क्रियान्वयन जिलेवार चयनित फसलों/आंवटित लक्ष्यों के अनुसार किया जावेंगा।ु  योजनान्र्तगत विभिन्न कार्यक्रमों का क्रियान्वयन संघन क्लस्टर के रूप में किये जाने हेत कृषकों का चयन यथासम्भव समूह के रूप में किया जावें।ु  योजना काय्रक्रमों के क्रियान्वयन में यथासम्भव स्थानीय स्तर पर पंचायत राज संस्थाओं एवं महात्मा गांधी नरेगा योजना से समन्वय स्थापित किया जावें।ु  योजनान्र्तगत विभिन्न कार्यक्रमों के तहत अनुदान हेतु आवेदन पत्र क्षेत्र के उपनिदेशक कृषि (विस्तार)/उप निदेशक उद्यान/सहायक निदेशक उद्यान/सहायक निदेशक कृषि (विस्तार)/कृषि अधिकारी/सहायक कृषि अधिकारी/कृषि पर्यवेक्षक को प्रस्तुत किये जा सकेगें।ु  पौध रोपण सामग्री/बीज के अतिरिक्त अन्य सभी आदान ग्राम सेवा सहकारी समिति/क्रय-विक्रय सहकारी समिति/लेम्पस/पैकस के माध्यम से उपलब्ध कराये जावे। कार्यालय स्तर से कोेई आदान क्रय नही किया जायेगा ।ु  सहकारी समिति/क्रय-विक्रय सहकारी समिति/लेम्पस/पैकस से आदान उपलब्ध कराने हेतु कृषि अधिकारी/सहायक कृषि अधिकारी/कृषि पर्यवेक्षक द्वारा कृषक को फसल विषेष की सिफारिष अनुसार परमिट जारी किया जायेगा ।ु  परमिट/सिफारिष अनुुसार कृषक हिस्सा राषि सहकारी समिति में जमा करवायी जाकर कार्यक्रम के प्रावधान अनुसार आदान स्वयं कृषक के द्वारा प्राप्त किये जायेंगे।ु  योजना अन्र्तगत कीटनाषी रसायन कृषि विभाग द्वारा रजिस्टर्ड निर्माता कम्पनियों में से प्राथमिकता से ‘ए’ व ‘ब’ श्रेणी पाये गये निर्माताओं के उपलब्ध कराये जावंे। ‘ए’ व ‘ब’ श्रेणी के कीटनाषी रसायन निर्माताओं के पास उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में राजस्थान हाॅर्टीकल्चर डवलपमेंट सोसायटी की पूर्व अनुमति से अन्य श्रेणी के कीटनाषी रसायन उपलब्ध कराये जा सकेंगे।ु  योजना कार्यक्रम अन्र्तगत कृषक द्वारा क्रय किये गये आदान का सहकारी संस्था द्वारा जारी बिल के पृष्ठ भाग पर स्वयं कृषक से आदान प्राप्ती प्रमाणित करवायी जाकर  हस्ताक्षर/अंगूठा निषानी प्राप्त किया जावे।ु  अनुदान क्लेमस् का कार्यालय द्वारा सत्यापन उपरांत बिल प्राप्त होने के अधिकतम एक माह में संस्था को आर.टी.जी.एस. द्वारा भुगतान सुनिष्चत किया जावें।ु  कृषक सहकारी संस्थाओं से षत् प्रतिषत लागत पर आदान क्रय करके भी अनुदान के क्लेम्स विभाग को प्रस्तुत कर सकेंगे, ऐसी स्थिति में विभाग द्वारा कृषक को क्लेम्स प्राप्ति के पश्चात अधिकतम 15 दिवस में अनुदान राषि का भुगतान आर.टी.जी.एस. के द्वारा किया जायेगा ।ु  योजनाकार्यक्रमों के तहत स्वीकृत अनुदान राषि सीधे ही लाभार्थी के खाते में आर.टी.जी.एस.के माध्यम से जमा कराई जायेगीे।ु  योजना कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में 16 प्रतिशत अनुसूचित जाति व 12 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति व 30 प्रतिषत महिला कृषकों को लाभान्वित किया जायेगा। योजनान्र्तगत अनुदान हेतु आवेदन निर्धारित आवेदन पत्र में प्राप्त करने होंगे। आवेदन पत्र पर संबंधित कृषक/संस्था/लाभार्थी का फोटो व जिस भूमि पर कार्यक्रम/गतिविधि ली जा रही है के भू-स्वामित्व का खसरा नम्बर  अंकित करना व मृदा एवं सिचाई पानी की जांचरिपोर्ट संलग्न करना आवष्यक होगा। यथासम्भव कृषक के मोबाईल नम्बर भी आवेदन पत्र में अंिकंत करवाये जावें।ु  योजना के तहत अनुदान प्राप्त करने के लिये आवेदन करने वाले वास्तविक आवेदक की मृत्यु होने की स्थिति में अनुदान राशि वास्तविक आवेदक के कानूनी उत्तराधिकारी को देय होगी। इस हेतु लाभार्थी को कानून उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।ु  कृषक के स्वंय की मालिकाना हक की भूमि पर योजना का लाभ देय होगा । रजिस्टर्ड लीज पर अनुदान देय नहीं होगा।ु  परियोजना आधारित समस्त कार्यक्रम जिला अधिकारी/खण्ड अधिकारी/निदेषालय को प्रस्तुत किये जा सकेंगे तथा परियोजना प्रस्ताव की एक प्रति सम्बधित जिला कार्यालय को आवष्यकरूप से उपलब्ध करायी जावे। जिला अधिकारी प्रस्ताव प्राप्त होने पर परियोजना स्थल का निरिक्षण कर मय फोटोगा्रफ अपनी टिप्पणी से निदेषालय को अवगत कराया जायेगा।ु  सम्बंधित जिला कार्यालय द्वारा योजना के तहत लाभार्थियो की कृषक श्रेणीवार डिजीटलाइज्ड सूची तैयार की जायेगी।