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विस्तार-प्रशिक्षण शाखा द्वारा संचालित गतिविधियॉं

1. मासिक कार्यशाला :-

राज्य में 10 जलवायुविक क्षेत्र हैं। प्रत्येक जोन में प्रतिमाह मासिक कार्यशाला के आयोजन का प्रावधान रखा गया है जिसका प्रभारी खण्डीय संयुक्त निदेशक कृषि को बनाया गया है। इन कार्यशालाओं में कृषि अधिकारी स्तर के अधिकारी भाग लेकर आगामी माह में अपनार्इ जाने वाली उन्नत कृषि की जानकारी मास्टर ट्रेनर्स से प्राप्त करते हैं। जिसका सम्प्रेषण उपजिला स्तरीय बैठकों, गोष्ठियों एवं अन्य प्रसार माध्यम से संबंधित अधिकारियों/ कर्मचारियों के द्वारा कृषकों तक कराया जाता है।

2. मासिक कलस्टर बैठक :-

प्रत्येक माह के प्रथम सोमवार या शुक्रवार को उपजिलों में मासिक कलस्टर बैठकों का आयोजन किया जाता है, जिसमें मासिक कार्यशाला में प्राप्त तकनीकी ज्ञान का सम्प्रेषण संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों को कराकर तकनीकी ज्ञान का प्रचार-प्रसार संबंधित कृषकों तक कराया जाता है।

3. क्षेत्रीय अनुसंधान एवं विस्तार सलाहकार समिति :-

प्रत्येक जलवायुविक क्षेत्र में खरीफ एवं रबी मौसम से पूर्व कृषि वैज्ञानिकों एवं विस्तार कार्यकर्ताओ की बैठक आयोजित की जाती है जिसमें चर्चा की गर्इ कृषि समस्याओं के आधार पर कृषि वैज्ञानिक अनुसंधान कार्य करते है तथा उनके द्वारा गत वर्षो में किए गए विभिन्न प्रकार के अनुसंधान कार्यो का विवरण प्रस्तुत किया जाता है तथा उस जलवायुविक क्षेत्र के लिए कृषकों के हित में पैकेज ऑफ प्रक्टिसेज में समाहित कर संशोधन किया जाता है।

4. ग्रामसेट आधारित प्रशिक्षण :-

पंचायत समिति एवं जिला स्तर पर कृषकों एवं कार्मिकों के प्रशिक्षण एवं कृषि विभाग के कार्यक्रमों के प्रबोधन के लिए ग्रामसेट आधारित प्रशिक्षणों का आयोजन किया जाता है जिसमें कृषकों के आने-जाने एवं रहने की व्यवस्था संबंधित उप निदेशक कृषि (वि0), जिला परिषद द्वारा की जाती है। इस हेतु आने-जाने का किराया, भोजन एवं आवास (रू0 150/प्रशिक्षणाथ्री/दिन), स्टेशनरी (रू0 25/प्रशिक्षणाथ्री) एवं तकनीकी साहित्य (रू0 50/ प्रशिक्षणाथ्री/दिन) की दर से कुल 275 रू0/प्रशिक्षणाथ्री/दिन का प्रावधान रखा गया है।

5. कृषि कार्मिकों को सीयूजी मोबाईल सुविधाः- :-

वर्ष 2012-13 से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अन्तर्गत कृषि विभाग के कार्मिकों को सीयूजी मोबाईल सुविधा उपलब्ध कराने हेतु प्रति कार्मिक 1100 रूपये प्रतिवर्ष दिये जाने का प्रावधान है। विभाग में अबतक कुल 5584 कार्मिकों को सीयूजी सुविधा से लाभान्वित किया जा चुका है।

6. किसान सेवा केनद्र :-

प्रत्येक कृषि पर्यवेक्षक, सहायक कृषि अधिकारी, सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) एवं जिला मुख्यालय पर कुल 5063 किसान सेवा केन्द्रों का गठन किया गया है।  ये किसान सेवा केन्द्र कृषि चिकित्सालय का कार्य करते हैं, इन किसान सेवा केन्द्रों पर प्रत्येक गुरूवार को किसानों को वैज्ञानिक खेती, सामाजिक वानिकी, जल ग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण, डेयरी, पशुपालन एवं उद्यानिकी आदि की नवीनतम जानकारी उपलब्ध करार्इ जाती है तथा कृषकों की समस्याओं का मौके पर ही निराकरण किया जाता है। समस्याओं का निराकरण नहीं होने पर ऐसी समस्या को पंजीकृत कर निदान हेतु उच्चाधिकारियों को अग्रेषित किया जाता है तथा आगामी समूह बैठक में उच्च स्तर से प्राप्त हल से कृषकों को अवगत कराया जाता है। साथ ही कृषकों की सुविधा एवं शिक्षा हेतु किसान सेवा केन्द्रों पर विभिन्न कृषि उपयोगी सामग्रियों का प्रदर्शन कराया जाता है।

7. किसान सेवा केन्द्र भवन किराया :-

किसान सेवा केन्द्रों के संचालन हेतु राज्य में भवनों का अभाव है।  अत: किसान सेवा केन्द्र भवनों के अभाव में कृषि पर्यवेक्षकों द्वारा कृषि तकनीकी ज्ञान किसानों को उपलब्ध कराने और उनकी समस्या निवारण के कार्य में कठिनार्इ होती है। किसानों के हितों में किसान सेवा केन्द्रों की महत्ता को दृष्टिगत रख वर्ष 1999-2000 से ऐसे कृषि पर्यवेक्षक स्तर के किसान सेवा केन्द्र जो राजकीय भवनों में नहीं चल रहे है या जो भवन किसान सेवा केन्द्र संचालन के लिए उपयुक्त नहीं हैं उनके लिए 150/-रूपये प्रतिमाह की दर से किराया दिये जाने का प्रावधान है।

8. किसान सेवा केन्द्र सुदृढीकरण (साज-सज्जा एवं पत्र-पत्रिका आवृति व्यय) :-

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत किसान सेवा केन्द्रों के सुदृढीकरण (साज-सज्जा) हेतु राशि रूपये 7500/- प्रति वर्ष प्रति किसान सेवा केन्द्र की दर से उपलब्ध कराया जाता है। इसी कार्यक्रम के अन्तर्गत नवीनतम उन्नत कृषि तकनीकी से संबंधित पत्र-पत्रिकाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उददेश्य से इन पत्र-पत्रिकाओं जैसे खेती, फल एवं फूल, कृषि विकास, समयकोण कृषि आदि के क्रय हेतु रूपये 500/- प्रति वर्ष प्रति किसान सेवा केन्द्र दिए जाने का प्रावधान रखा गया है।

9. एक दिवसीय महिला कृषक प्रशिक्षण :-

इस कार्यक्रम के तहत कृषक महिलाओं को कृषि प्रशिक्षण दिया जाता है और एक शिविर में 30 महिला कृषकों पर 3000/रू0 व्यय किये जाने का प्रावधान है। एक दिवसीय प्रशिक्षण राज्य योजना के अन्तर्गत आयोजित करवाये जा रहे थे। जिसमें बीज उत्पादन एवं मृदा स्वास्थ्य, जल का समुचित उपयोग, पौद्य-संरक्षण यंत्र एवं कृषि उपकरणों के साथ-साथ अन्य कृषि तकनीकी के बारे में जानकारी दी जाती हैं।

10. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिषन कार्यक्रम :-

इस कार्यक्रम के तहत पंचायत समिति/ब्लाक स्तरीय एक दिवसीय फसल पद्वति आधारित प्रषिक्षण आयोजित करवाये जाते है। इन प्रशिक्षणों में 30 पुरूष/महिला कृषकों द्वारा भाग लिया जाता है। इन प्रषिक्षणों का आयोजन चार सत्रों में करवाया जाता है। जिसमें प्रथम सत्र खरीफ पूर्व द्वितीय सत्र खरीफ मध्य, तृतीय सत्र रबी पूर्व एवं चतुर्थ सत्र रबी के मध्य जिसके लिये प्रति प्रशिक्षण 3500/- रू0 की दर से कुल 14000/- एक प्रषिक्षण हेतु दिये जाने का प्रावधान है।

11. महिला सशक्तिकरण (दो दिवसीय महिला प्रशिक्षण) :-

उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम 2014-15 से नेशनल आॅयल सीड्स एवं आॅयल पाॅम मिशन (एन.एम.ओ.ओ.पी.) योजना के तहत आयेाजित करवाये जायेगें। जिसकी अवधि दो दिवसीय होती है। इन प्रशिक्षणों में 30 महिला कृषकों द्वारा भाग लिया जाता है। प्रति प्रशिक्षण 24000/- रूपये की राशि व्यय किये जाने का प्रावधान है।

12. दो दिवसीय संस्थागत पुरूष/महिला कृषक प्रशिक्षण :-
उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम 2014-15 से नेशनल आॅयल सीड्स एवं आॅयल पाॅम मिशन (एन.एम.ओ.ओ.पी.)योजना के तहत आयेाजित करवाये जायेगें। जिसकी अवधि दो दिवसीय होती है। इन प्रशिक्षणों में 30 कृषकों द्वारा भाग लिया जाता है। प्रति प्रशिक्षण 24000/- रूपये की राशि व्यय किये जाने का प्रावधान है।

13. पुरूष एवं महिला कृषक भ्रमण :-
इस कार्यक्रम के अन्तर्गत अन्तर्राज्यीय (राज्य के बाहर) व अन्तराराज्यीय (राज्य के अन्दर) पुरूष/महिला कृषक भ्रमण कार्यक्रम आयोजित करने पर 40-45 काश्तकारों के एक दल पर 5 से 7 दिवसीय भ्रमण पर प्रति भ्रमण राशि क्रमश: 1,50,000/- रूपये व 1,00,000/- रूपये की दर से व्यय किये जाने के प्रावधान है।

14. कृषि में अध्ययनरत छात्राओं को प्रोत्साहन राशि :-
कृषि विषय लेकर 10+2 कृषि, स्नातक एव स्नातकोत्तर कृषि तथा पी.एच.डी. में अध्ययन करने वाली छात्राओं को वर्ष 2012-13 से क्रमश: राशि रू0 5000/-, 10000/- तथा 15000/- रूपये प्रति छात्रा प्रतिवर्ष प्रोत्साहन राशि राज्य योजना अन्र्तगत दिये जाने का प्रावधान रखा गया है।

15. स्टाफ प्रशिक्षण एवं शिक्षा :-
विभागीय अधिकारियों को राज्य के अन्दर एवं राज्य के बाहर की प्रशिक्षण संस्थानों पर विभिन्न प्रशिक्षणों में भाग लेने हेतु भेजा जाता है।  राज्य स्तरीय कृषि प्रबन्ध संस्थान, दुर्गापुरा-जयपुर एवं कृषि प्रशिक्षण केन्द्र, टोंक में विभागीय प्रशिक्षण केन्द्रों पर उनके प्रस्तावित प्रशिक्षण कार्यक्रम के अनुसार अधिकारियों/ कर्मचारियों को प्रशिक्षण हेतु भिजवाया जाता है।  इसी प्रकार सिंचार्इ प्रबन्ध एवं प्रशिक्षण संस्थान, कोटा, केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) जोधपुर, हरीश चन्द्र माथुर-राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान, जयपुर, उदयपुर, कोटा, जोधपुर, बीकानेर पर भी अधिकारियों को उनके प्रशिक्षण कार्यक्रमानुसार प्रशिक्षण हेतु भिजवाया जाता है।