विभागीय परिचय

भारत में राजस्थान राज्य 342 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में सबसे बडा राज्य है, जो 23’ 30’ एवं 30’12’ उत्तरी अंक्षास 69’30’ और 78’ 17’ पूर्वी देशान्तर के मध्य स्थित है। इसके उत्तर में पंजाब एवं हरियाणा जैसे विकसित राज्य हैं, और पूर्व में उत्तर-प्रदेश है, दक्षिण और दक्षिण पश्चिम में मध्य-प्रदेश एवं गुजरात स्थित है। उत्तर पूर्व से दक्षिण-पश्चिम में फैली अरावली पर्वत श्रृंखला राज्य को लगभग दो विपरीत एवं असमतल भू-भागों रेगिस्तानी और अर्द्ध-बालूर्इ इलाकों में विभक्त करती है।

उत्तरी-पश्चिमी भाग जो कुल क्षेत्रफल का 61 प्रतिशत है, मरूस्थलीय या अर्द्ध-मरूस्थलीय है और पूर्णत: वर्षा पर निर्भर है। इस भाग में श्रीगंगानगर, चूरू, हनुमानगढ़, बीकानेर, बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर जिले हैं जिनमें वर्षा 20 से 35 सेन्टीमीटर होती है शेष उत्तरी-पश्चिमी भाग जिसमें झुंझुनू, सीकर, नागौर, पाली व जालोर जिले आते हैं उसमें सामान्यत: 30 से 50 सेन्टीमीटर तक वर्षा होती है।

राज्य का दक्षिणी-पूर्वी क्षेत्र, जो कुल क्षेत्रफल का 39 प्रतिशत है, उपजाऊ है। इस क्षेत्र के एक भाग की मिट्टी काली या बलूर्इ-दोमट है जो कुल क्षेत्रफल का 10 प्रतिशत है उसमें चित्तौडगढ़, झालावाड़, बांसवाड़ा व कोटा जिले आते हैं। इस भाग में वर्षा सामान्यत: 80 सेन्टीमीटर से अधिक होती है। इसका दूसरा भाग जो पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्र है जो कि कुल क्षेत्रफल का 29 प्रतिशत है उसमें अजमेर, जयपुर, अलवर, भरतपुर, धोलपुर, सवार्इमाधोपुर, सिरोही, बून्दी, टोंक डूंगरपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा व राजसमन्द जिले आते हैं। इस भाग में वर्षा 50 से 80 सेन्टीमीटर तक होती है।

 

कृषि विभाग की स्थापना


रियासतों के एकीकरण के फलस्वरूप राज्य का एकीकृत कृषि विभाग वर्ष 1949 में स्थापित किया गया और वर्ष 1952 में इसका विस्तार किया गया। कृषि में कृषि जिन्सों के उत्पादन के अतिरिक्त पशुपालन विभाग को कृषि विभाग से अलग कर दिया। विभाग का वर्ष 1955 में पुनर्गठन किया गया और एक खण्ड स्तर पर विभाग का ढांचा अस्तित्व में आया। विस्तार का कार्य, क्षेत्र स्तर पर पंचायत समितियों में कार्यरत कृषि पर्यवेक्षकों द्वारा किया जाता है। तकनीक विकसित करने हेतु विषय विशेषज्ञ प्रकोष्ठ यथा वनस्पति-पौध-विज्ञान, पौध-व्याधि-विज्ञान, कीट विज्ञान, शस्य विज्ञान, रसायन विज्ञान, कृषि सांख्यिकी आदि का गठन किया गया एवं क्षेत्रीय स्तर पर अनुसंन्धान केन्द्र एवं प्रयोगशालाऐं स्थापित की गई ।